पंजाब पाँच नादियों को संजोय हुए एक धरा, जो भारत को केवल अन्न जल से संफ्न नहीं, बल्कि परिश्रम, वीरता, एकता और गुरुओं के ज्ञान से भी मिलाती है । पंजाब ने भारत को केवल अन्न और जल ही नहीं दिया, बल्कि अपने गुरुओं के ज्ञान, बलिदान और संस्कृति से भी देश की दिशा और दशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
इतिहास गवाह है कि किस तरह से हमारे गुरुओं ने मुगलों के काल में भारतीय धरोहर के लिए बलिदान दिए है और हमें सदैव सत्य और धर्म मार्ग की ओर का मार्गदर्शन दिया है। देश विभाजन के समय सबसे बड़ी पीडा पंजाब के हिस्से आई और आज भी पंजाब के कई हिस्से उन यादों से उभर रहे हैं।
हमें याद है 1960 के दशक में जब भारत में हारित क्रांति आदोलन(भारत में अनाज उत्पादन में कमी, और भारत में बढ़ते आयात को देखते हुए) शुरू किया गया। जिसका उद्देश्य – किसानों को ज्यादा उपज वाले बीज देना, आधुनिक खाद और कीटनाशकों को सब तक पहुंचना, कृषि का वैश्वीकरण (गैर प्रौद्योगिक राष्ट्रों में प्रौद्योनिकी का प्रसार, और कृषि प्रमुख क्षेत्रों में निगमों की स्थापना करना) था। और इस दौरान पजांव सशक्त, संपन्नता और गुणवता के साथ उभर कर सबसे आगे दिखा। हारित क्रांति की सफलता पंजाब की जरखेज जमीन को कभी भूला नहीं सकती है। मेरा मनाना है कि यह भूमि केवल कृषि के लिए ही उपजाऊ नहीं है, पंजाब (पंच + अब) अपने नाम की तरह ही यह धरा अन्न, कला, जल, शौर्य, और ज्ञान से जरखेज है। पंजाब को, कृषि-जो की अन्न से पूर्ण, पांच नदियां- जो जल से पूर्ण, कला स्वर व मधुर वाणी से पूर्ण, शौर्य वीरता त्याग से पूर्ण, वहीं ज्ञान – दसों गुरुओ के ज्ञान और मार्गदर्शन से पूर्ण होता है। 1960 के समय पंजाब, भारत के पांच सबसे अमीर राज्यों की श्रेणी में से एक था।
लेकिन आज वही जरखेज पंजाब अनेको प्रकार की चुनौतियों और कमियों के साथ जूझ रहा है। वो पंजाब जिसने देश में अत्न संकट के समय कृषि के उत्थान में देश को अन्य राज्यों से अधिक आगे बढ़कर सहयोग किया, वही पंजाब आज चिंता का विषय है। कृषि संकट, विदेशों में पलायन, बेरोजगारी, खालिस्तानी आंदोलन, धर्मांतरण और सामाजिक असंतुलन। यह सभी विषय पंजाब के लिए सोचने पर मजबूर करते हैं कि जो राज्य 90 के दशक की शुरुआत में प्रति व्यक्ति आय के लिए महाराष्ट्र, हरियाणा के बाद तीसरा स्थान पर था आज उसकी कृषि विकास में गिरावट से 16वें स्थान पर आ गया है।
साल दर साल के आकड़ों को देखा जाए तो पाया जाता है कि 2020 तक पंजाब में कृषि संबंधी क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (GSVA) की वृद्धि 0.47 तक आ गई जबकि इसी दौरान UP (1.97%) हरियाणा(5.47%) से तुलानात्मक रूप से बेहतर रहा । लेकिन आज 2025-26 में पंजाब 16वें स्थान पर आ गया है। पंजाव की स्थिति लगातार पलायन और अन्य चुनौतियों भी प्रभावित है। जैसा की हम सभी जानते हैं कि विदेशों में सबसे ज्यादा जाने वालों की संख्या पंजाब से है। विदेश जाते हुए परिजनों को देख युवा पीड़ी भी प्रभावित हो कर विदेश की तरफ रुख कर रही है।
जिसमे सवाल यहाँ भी है कि युवा विदेशों की ओर प्रोत्साहित क्यों है? क्या ये कारण रोजगार की कमी है? तो इसके लिए इसके तथ्यों की ओर देखते है। PIB की रिपोर्ट 2023,के अनुसार 2011 में पंजाब से 1244056 लोगों ने पलायना किया। अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन और मानव विकास संस्थान के द्वारा “भारत रोजगार रिपोर्ट 2024″ जिसमें रोजगार स्थिति सूचकांक दर्शाया गया, जिसके अनुसार 2005 में पंजाब 0.45 सूचकांक था जो कि घटकर 2022 में 0.53 सूचकांक पर पहुंचा और इसी के साथ सूचकांक में पंजाब 2005 में 13वें स्थान से घटकर 2022 में 16वें स्थान पर आ गया। 2024 में Periodic Labour fores Survey से पता चलता है कि पंजाब बेरोजगारी दरु 7.7% है जो राष्ट्रीय दर 6.7% से आधिक है। वही Periodic Labour fores Survey 2025 के आंकड़ो से पता चलता है कि पंजाब में बरोजगारी दर (15 से 30 वर्ष युवा)19.3% दर्ज हुई है जो की राष्ट्रीय दर 9.9% से लगभग दुगुनी है। जो की पंजाब में गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
पंजाब में Skills की कमी भी एक चुनौती हो सकती है और इसी को देखते हुए सरकार ने “Punjab Skill Development Mission” PSDI को शुरू किया और विभिन्न क्षत्रो जैसे (IT/ Engineering/ Beauty/Real state) सरकार के द्वार तैयारी की गई। वही अन्य योजनाओं में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) शामिल है, जिसका लक्ष्य शहरी या ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं की परवाह किए बिना, बेरोजगार या स्कूल या कॉलेज छोड़ चुके युवाओं को रोजगार प्रदान करना है। दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के अंतर्गत गरीब शहरी युवाओं को लक्षित किया जाता है, जबकि दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयूजीकेवाई) के तहत गरीब ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। संकल्प (आजीविका संवर्धन के लिए कौशल अधिग्रहण और ज्ञान जागरूकता) कौशल, विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत एक व्यापक योजना है। राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) एक सरकारी कार्यक्रम है जो कंपनियों को शिक्षुता के अवसर प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु नियोक्ताओं और प्रशिक्षुओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जैसी विभिन्न प्रक्षिशन योजनाओ को राज्य में लाया गया।
FY24-25 में Skills Development के लिए 179 करोड़ रूपय का आवंटन हुआ इसी के साथ सरकार के द्वारा किये गए विभिन्न प्रयतन कस गतिविधियों से 2024 में, PSDM के अंतर्गत 21000 से ज्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी गई जिसमें से 7500 को नौकरियां मिली, हालाँकि की प्लेसमेंट दर बहुत ही कम रहा।
सरकार के निरंतक प्रयासों और आकंडो के बावजूद, राज्य में बेरोजगारी का स्तर अभी निराशाजनक और चिंतन का विषय है मात्रात्मक विस्तार से अपेक्षित गुणात्मक प्रभाव प्राप्त नहीं हुआ है।






