सीमाओं के पार भारतीयता का संवाद मोहन भागवत का वैश्विक प्रवास और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की समकालीन प्रासंगिक – डॉ. एकता जैन
सीमाओं के पार भारतीयता का संवाद मोहन भागवत का वैश्विक प्रवास और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्‘ की समकालीन प्रासंगिक डॉ. एकता जैन स्वतंत्र लेखिका आज तकनीक ने संसार की भौगोलिक दूरियाँ लगभग समाप्त कर दी हैं, किंतु क्या मनुष्य वास्तव में एक–दूसरे के निकट आया है? संचार के साधन बढ़े हैं, पर धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक अस्मिता, प्रवासन…






